1. कुंग-फू-बु-जू अर्थात् कुंग-फू
प्रत्येक सभ्य और सुसंस्कृत व्यक्ति स्वाभाविक रूप से ही किसी को कोई हानि नहीं पहुँचाना चाहता। वह चाहता है कि न तो वह किसी को आर्थिक अथवा शारीरिक क्षति पहुँचाए और न ही कोई उस पर आक्रमण ही करे। फिर भी समाज में स्वच्छन्द घूम रहे अपराधी प्रवृति के कुछ समाज विरोधी तत्व कभी-कभी शांतप्रिय नागरिकों पर हमला कर ही देते हैं। इस प्रकार के हमलों से बचाव के लिए ही जूडो की कला का विकास किया गया और यही कारण है कि जूडो को मुख्य रूप से हमले का नहीं आत्मरक्षा का हथियार माना जाता है। भारतीय और रोमन स्टाइल की शक्तियों के समान ही जूुडो और बाक्सिंग को एक कलात्मक खेल का दर्जा सम्पूर्ण विश्व में मिल चुका है
और यही कारण है कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तरों पर इनकी प्रतियोगिताएं भी होती रहती हैं। इन दोनों ही कलर ओं में हमारा उद्देश्य प्रतिपक्षी के वार को निष्फल कर अपने आप को बचाना होता है न तो हमारा उद्देश्य प्रतिपक्षी पर वार करना होता है और न ही उसे चोट पहुँचाना। प्रतियोगिता में भाग लेते समय दोनों ही प्रतिद्वन्द्वी एक-दूसरे पर जो वार करते भी हैं वे न तोवास्तव में आघात होते हैं और न ही उनका उद्देश्य दूसरे को चोट पहुँचाना होता है वे तो मात्र इस उद्देश्य से किए जाते हैं कि दूसरा प्रतियोगी उनसे बचाव कर अपनी कला का प्रदर्शन कर सके।
किसी आतातायी द्वारा अचानक आक्रमण कर दिए जाने पर जूडो का जानकार व्यक्ति आसानी से अपनी सुरक्षा तो कर ही लेता है आक्रांता को इस तरह परास्त भी कर देता कि वह दोबारा आक्रमण करने की चेष्टा भी न करे परन्तु कछ व्यक्ति प्रकृति से ही अपराधी और इस सीमा तक नष्ट होते हैं कि अपनी कुचेष्टाओं में असफल हो जाने पर भी सामान्य व्यवहार कर ही नहीं पाते। वे बारम्बार आपको चोट पहुँचाने की चेष्टा करते हैं। ऐसे व्यक्तियों से बचने के लिए जुडो का ज्ञान तो व्यक्ति को होना ही चाहिए परन्तु उन्हें जब तक उचित सजा नहीं दी जाएगी वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे। ऐसे व्यक्तियों का दिमाग ठिकाने लगाने के लिए ही कराटे की कला का आविष्कार किया गया कराटे में आप अपने हाथ से प्रतिद्वन्द्वी पर इस प्रकार वार करते हैं कि आपके एक ही हाथ के वार से उसे दिन में तारे नजर आने लगे। यही कारण है कि कराटे में हमलावर से बचाव से भी अधिक जोर प्रतिपक्षी पर जोरदार आक्रमण करने में दिया जाता है। इस प्रक्रिया में आपका उद्देश्य हमलावर को कम से कम इतनी चोट पहुँचाना तो रहता ही है कि वह आपके द्वारा किए गए वार से लस्तपस्त होकर जमीन पर गिर जाए। यही कारण है कि जूडो और कराटे का जानकार व्यक्ति निहत्थे रहकर भी अपनी रक्षा तो भली प्रकार कर ही लेता है
समाज-विरोधी तत्वों से अन्य व्यक्तियों की रक्षा करने में भी समर्थ रहता है। जुडो में दाव-पेचों की जानकारी और अभ्यास सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं, शारीरिक शक्ति का उतना महत्त्व नहीं होता। यद्यपि सामान्य स्वास्थ्य और शरीर की चुस्ती-फुर्ती तो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका निबाहते हैं और जूडो भी इसका अपवाद नहीं। इसके विपरीत कराटे में हाथ की चाप और पैर की ठोकर मारकर विरोधी को पस्त किया जाता है अतः हथेली और पांव के पंजों का अत्यन्त कठोर व शक्तिशाली होना नितान्त आवश्यक है। बॉक्सिंग के खेल होते हुए भी, इसमें बहुत तेजी के साथ तरह-तरह से विरोधी को घुंसे मारे जाते हैं, घुंसे मारे क्या जाते हैं उसके ऊपर घंमों की बारिश ही कर दी जाती अतः हाथ-पैरों का तेजी से निरन्तरक्रियाशील रहना बॉक्सिंग की प्रथम शर्त है। परन्तु कंग-फू तो वास्तव में इन तीनों का मिश्रण है। जूडो के दाब पेचों में सिद्धहस्त, कराटे के लिए शक्तिशाली बनाए गए हाथ-पैरों व शारीरिक अवयवों का स्वामी और बॉक्सर की तरह बिना थके निरन्तर वार करने में समर्थ व्यक्ति ही कंग-फूका विद्यार्थी बन सकता है। कुंग-फू जूडो कराटे का अगला कदम ही नहीं है बल्कि यह तो जूडो, कराटे, बॉक्सिंग और भारतीय योग-साधना का मिश्रण है।
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