परिचय
नमस्कार दोस्तों–
कराटे शब्द दो शब्दों के मेल से बना है– क: र:+टे: । 'कर' का अर्थ खाली एवं टे का अर्थ 'हाथ' होता है अतः 'कराटे' का शब्दार्थ हुआ 'खाली हाथ।'
इस कला के द्वारा खाली हाथ रह कर ही आक्रमणकारी का मुकाबला और उसे प्रास्त करना, खाली हाथों से ही लकड़ी, ईट, बास, आदि को तोड़ देना आदि कार्य किए जाते हैं। कहा जाता है, कि कराटे का उद्गम चीन देश से हुआ परंतु वास्तविकता यह है, कि इसका उद्गम लूच नामक दीप से हुआ है। जोकि जापान से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर है। यह दीप सन 1879 तक चीन तथा जापान दोनों देशों की अधीनता स्वीकार कर, उन्हें उपहार आदि भेजा करता था,परंतु बाद में जापानियों ने इस दीप पर अपना पूर्ण अधिकार स्थापित कर लिया और इसका नाम बदलकर ओकीनावा रख दिया।
पराजित करने के बाद जापानियों ने इस दीप वासियों पर अनेक अत्याचार किए तथा अनेक प्रतिबंध भी लगाए जिनमें से एक किसी दीप वासी द्वारा शस्त्र धारण ना करना भी था, ऐसी स्थिति में सशस्त्र जापानी इन अत्याचारों से आत्मरक्षा के लिए दीप वासियों ने खाली हाथ रह कर आक्रमणकारी का मुकाबला तथा आत्महत्या करने की जिस कला को विकसित किया वहीं आज कराटे के नाम से सुप्रसिद्ध है।
इस कलाकार जानकार व्यक्ति अकेला होते हुए भी अपने से अधिक शक्तिशाली दो आक्रमणकारियों का भी सफल मुकाबला कर सकता है, तथा स्वयं निशास्त्र रहते हुए भी शास्त्रधारी शत्रु को प्राप्त कर सकता है। विभिन्न देशों में यह कला कुंग-फू, कैन्यो तथा शोटगन र्यू आदि भिन्न-भिन्न नामों से प्रसिद्ध है।
इच्छाशक्ति की प्रबलता ही कराटे की सफलता का मूल आधार है। इसके अभ्यास जूजूत्सु के साथ बहुत कुछ मेल खाते हैं, प्रस्तुत खंड में कराटे के प्रमुख अभ्यास पर प्रकाश डाला गया है, इस कला के अन्य सभी सामान्य अभ्यास खंड की प्रारंभिक में है, प्रारंभ के अध्ययन तथा अभ्यास में निष्णात व्यक्त ही कराटे के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त कर सकता है।
धन्यवाद
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Karate
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