कोर्स दूसरा (2)
अंग - प्रहार
आमुख–
पिछले अभ्यास में वर्णित उपायों द्वारा जब आप अपने शारीरिक अंगों को पर्याप्त मजबूत बना लें, तब आपको उनके द्वारा प्रहार करने की विधियों का अभ्यास करना चाहिए।
विभिन्न अंगों को प्रहार के लिए उपयोग में लाने वाली विधियों का उल्लेख इस मैं किया जा रहा है।
अभ्यास 1
अंगुलियों से प्रहार–
(१) एक अंगुली से–
हाथ की मुट्ठी इस प्रकार बांध है कि केवल तर्जनी अंगुली बाहर डंडेे की भांति सीधी निकली रहे।
आवश्यकता के समय इस उंगली द्वारा आप शत्रु की पसलियों के जोड़ अथवा आंख पर प्रहार कर सकते हैं। विशेषताः स्त्रियों के लिए यह प्रहार सुगम तथा अधिक उपयोगी सिद्ध होता है।
(२) दो अंगुलियों से–
तर्जनी तथा मध्यमा अंगुली को अंग्रेजी के अक्षर (V) की भांति खुली रखकर, शेष उंगलियों की मुट्ठी बांध लें।
उक्त दोनों तनी हुई उंगलियों द्वारा शत्रु की आंखों पर चोट की जा सकती है। स्त्रियों की इज्जत खतरे में हो, तब उन्हें इस प्रहार का प्रयोग करना चाहिए।
(३) नाइफ हैंड–
चारों उंगलियों तथा अंगूठे को परस्पर मिलाकर सीधा रखें। फिर हथेली की गद्दी द्वारा शत्रु की हथेली, कलाई, पसली, बाह, कनपटी, गर्दन अथवा हंसली की हड्डी पर प्रहार करें। इसकी चोट भयानक होती है।
घुसे अथवा ठोकर के वार को रोकने में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
(४) शेर जबड़ा–
। चारों अंगुलियों को परस्पर मिला लें तथा अंगूठे को उनसे अलग रखें। फिर उन्हें चित्र में प्रदर्शित स्थिति के अनुसार फैला लें। इस आकृति को शेर जबड़ा कहा जाता है। इसके द्वारा आप शत्रु की गर्दन पर प्रहार करके उसे परास्त कर सकते हैं।
(५) अंगुलियों की गांठ से–
अंगुलियों के मध्य भाग की जोड़ की हड्डी द्वारा भी तेज प्रहार किया जा सकता है।
चित्र में दिखाएं अनुसार मुट्ठी बांधकर अंगुलियों के पृष्ठ भाग की गांठ द्वारा शत्रु के चेहरे, ठोड़ी, गर्दन तथा पसलियों के जोड़ पर चोट पहुंचाकर उसे पराजित किया जा सकता है।
अभ्यास 2
घुसे का प्रहार–
सब अंगुलियों की मुट्ठी बांधकर घुसा तैयार करें। फिर, अपने बाएं पांव तथा बाईं भुजा को थोड़ा आगे तथा दाएं पांव तथा दाईं भुजा को थोड़ा - सा पीछे रखते हुए दाई भुजा की कोहनी को 90 डिग्री से कुछ अधिक कोण में मोड़ लें तथा मुट्ठी को दाएं कूल्हे पर टिकाए रखें।
विरोधी के आक्रमण करने पर तुरंत ही सीधी भुजा तथा सीधी टांग को आगे लाकर बाएं हाथ की मुट्ठी को बाएं कूल्हे पर रखते हुए दाएं हाथ की कसी हुई मुट्ठी को थोड़ा सा मोड़ते हुए विरोधी के सीने अथवा पसलियों के जोड़ पर प्रहार करें। इसके लगते ही वह अपना पेट पकड़ कर बैठ जाएगा।
अभ्यास 3
हथेली की गद्दी का प्रहार–
(१) ठोड़ी पर प्रहार–
हथेली की गद्दी द्वारा शत्रु की ठोड़ी पर प्रहार किया जा सकता है, इससे उसकी गर्दन टूट सकती है,अथवा हंसली उतर सकती है।
हथेली की गद्दी का प्रहार करते समय चारों उंगलियों तथा अंगूठे को भलीभांति खड़ा करके रखना चाहिए इसमें अंगुलियों तथा अंगूठे को खुला रखा जाता है।
(२) निम्न भाग का प्रहार–
अंगुलियों अथवा अंगूठे को मोड़कर मजबूती से मुट्ठी बांध लें, तत्पश्चात हथेली की गद्दी से शत्रु के सिर,गर्दन, कंधे,अथवा पसलियों पर हथौड़े की भांति नीचे अथवा बगल की ओर से प्रहार करें। प्रहार करते समय मुट्ठी को खूब कस लेना चाहिए।
इस प्रकार की चोट से शत्रु चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ेगा।
(३) मुट्ठी के पिछले भाग से प्रहार–
मुट्ठी को भली-भांति कस कर उसके पिछले भाग से शत्रु के चेहरे अथवा पसली पर प्रहार करें तो वह पीड़ित होकर नीचे गिर पड़ेगा।
यह प्रहार केवल उसी हालत में किया जाता है, जब विरोधी आपके दाएं या बाएं और बहुत समीप में हो।
अभ्यास 4
कुहनी का प्रहार–
(१) ऊपर का सीधा प्रहार–
मुट्ठी भली-भांति कसकर बंद करने के बाद कुहनी को कंधे की सीध में लाकर, दुश्मन की ठोड़ीपर पूरी ताकत के साथ इस प्रकार प्रहार करना चाहिए कि प्रहार के बाद अपनी कोहनी ऊपर को उठ जाए।
इस चोट को खाकर विरोधी लड़खड़ा कर जमीन पर आ गिरेगा।
(२) पीछे की ओर प्रहार–
यदि विरोधी ने पीछे आकर दोनों हाथों से आपकी गर्दन दबोच ली हो, तो अपने बाएं हाथ को आगे लाकर उसकी मुट्ठी को कस कर बांध लें। फिर, अपने शरीर तथा कोहनी को तेजी के साथ थोड़ा दाएं ओर को घुमाते हुए बाईं कोहनी से शत्रु के पेट अथवा पसली के जोड़ वाले स्थान पर प्रहार करें। इस प्रहार से वह तिल मिलाकर वह आपको छोड़ देगा।
यदि शत्रु ने आपको अधिक कसकर पकड़ रखा हो ओर घूमने की गुंजाइश ना हो, तो आप पहले सिर को पीछे की ओर घुमा कर उसके मुंह अथवा नाक पर टक्कर मारे ऐसा करने पर उसकी पकड़ जब ढीली पड़ जाए, तब पूर्वाक्त प्रहार से उसके पेट में कोहनी का तेज प्रहार करके स्वयं को छुड़ा ले। चित्र में देखें-
(३) अन्य प्रहार–
यदि शत्रु ने बगल अथवा कमर से पकड़ रखा है, तो आप उसकी कनपटी, मुंह, गर्दन अथवा कमर पर कोहनी का जोरदार प्रहार करके भी उससे स्वयं को छुड़ा सकते हैं।
अभ्यास 5
घुटने का प्रहार–
घुटनों द्वारा शत्रु की जांग, पसली तथा अंडकोषो के मध्य भाग पर प्रहार किया जाता है।
घुटनों द्वारा सीधी बगल में अथवा नीचे की ओर मार दी जाती है। इस हेतु घुटनों को मोड़कर तथा पांव को ऊपर उठाकर शत्रु की जांघों के बीच पूरी ताकत से घुटना मारना चाहिए।
घुटनों की मार बहुत खतरनाक होती है। अतः इसका सोच समझ कर ही प्रयोग करना चाहिए इस मार्ग से शत्रु एक बार में ही नीचे गिर पड़ता है। अपने से अधिक शक्तिशाली तथा लंबे कद वाले दुश्मन पर इसका प्रहार करना अधिक उपयोगी रहता है।
अभ्यास 6
लात का प्रहार–
लात के द्वारा घुटने, जांघ के मध्य भाग में अथवा अंडकोष पर लात (किक) मारकर शत्रु को रोका जा सकता है । यदि दुश्मन चाकू, छुरा आदि लेकर मारने आ रहा हो, तो उस पर पांव का प्रहार करना अच्छा रहेगा, परंतु इस प्रहार को करते समय अपना शारीरिक संतुलन बनाए रखना चाहिए।
(१) पीछे की ओर प्रहार –
यारी दुश्मन नहीं पीछे से आकर आप की गर्दन पकड़ ली हो, तो अपने बाएं अथवा दाएं घुटने को उठाकर, पूरी शक्ति के साथ शत्रु के घुटने की कटोरी पर प्रहार करें, इससे उसका घुटना बेकार भी हो सकता है।
स्त्रियों के लिए यह प्रहार अधिक उपयोगी है। यदि वे ऊंची एड़ी के जूते पहने हो तो, उन्हें आक्रमणकारी की पिंडली की हड्डी अथवा घुटने पर उक्त विधि से प्रहार करना चाहिए।
(२) सामने की ओर प्रहार –
यदि शत्रु घुसा अथवा चाकू मारना चाहता हो तो अपने दाएं पांव को ऊंचा उठाकर पूरी ताकत के साथ उसके पेट अथवा सीने पर प्रहार कीजिए तथा मारने के बाद अपने पांव को तुरंत पीछे हटा लीजिए। इसमें अपना संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। अतः अपने दूसरे पांव को थोड़ा सा मोड़ने के बाद ही धक्का मारना चाहिए।
(३) मुंह पर प्रहार –
यदि दुश्मन सामने से छुरा आदि लेकर आक्रमण के लिए आ रहा हो तो आप अपने बाएं पांव को घुमाते हुए उसकी कनपटी पर निशाना साध कर प्रहार करें तथा प्रहार के बाद अपने पांव को तुरंत ही पीछे हटा कर स्वयं पहले सीधे हाथ की ओर जमीन पर गिर पड़े, तत्पश्चात तुरंत ही उठ कर खड़े हो जाएं। इस विधि से शत्रु आप का कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। यदि वह छुरा फेंकेगा तो वह भी आपके नीचे गिर जाने के कारण व्यर्थ ही हो जाएगा।
अभ्यास 7
सिर की टक्कर –
शिर से टक्कर मारने का प्रयोग पराया नहीं करना चाहिए, परंतु जब दुश्मन एकदम समीप हो तथा कोई अन्य उपाय प्रभावकारी ना जान पड़ता हो, तब इसका प्रयोग किया जा सकता है।
(१) सामने की टक्कर –
यदि दुश्मन ने सामने से अपनी दोनों बांहों के घेरे में आप को जकड़ लिया हो, तब आप अपने सिर को थोड़ा - सा पीछे ले जाकर पहले अपनी गर्दन की मांसपेशियों को भलीभांति कड़ा कर लें। फिर पूरी ताकत के साथ दुश्मन के मुंह पर अपने सिर की टक्कर मार दें। इस प्रहार से वह या तो लड़खड़ा कर पृथ्वी पर गिर पड़ेगा अथवा दूर भाग जाएगा।
(२) पीछे की टक्कर –
यदि दुश्मन ने पीछे से आकर आपकी गर्दन को दबोच लिया हो तो पहले अपने सिर को थोड़ा सा आगे की ओर झुकाइए, फिर गर्दन की मांसपेशियों को कड़ा करके पूरी ताकत के साथ अपने सिर को पीछे ले जाकर दुश्मन के मुंह पर मार दीजिए। इस चोट से उसे छठी का दूध याद आ जाएगा और वह आपको तुरंत छोड़ देगा।
अभ्यास 8
पांवों की स्थितियां
प्रत्याक्रमण अथवा सुरक्षा के समय अपने पांव की स्थिति पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक होता है, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे। पांव की अनेक स्थितियां हो सकती हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं –
(१) चित्र में प्रदर्शित 'अ' स्थिति के अनुरूप दोनों पंजों को खुला हुआ तथा दोनों एड़ियों को पीछे से मिला हुआ रखा जाता है।
(२) चित्र में प्रदर्शित 'ब' स्थिति के अनुसार दोनों पांवों के अगले तथा पिछले भागों को मिला कर रखा जाता है।
(३) चित्र में प्रदर्शित 'स' स्थिति के अनुसार दोनों पंजों के बीच 1/2 फुट तथा दोनों एड़ियों के बीच 1/4 फुट का फैसला रखा जाता है।
(४) चित्र में प्रदर्शित 'द' स्थिति के अनुसार दोनों पंजों के बीच 1/2 फुट तथा दोनों एड़ियों के बीच 1/4 फुट का फैसला रखा जाता है।
चित्र देखिए-
पावों को आगे बढ़ा कर रखने की मुख्य स्थितियां निम्नानुसार हैं –
(१) चित्र में प्रदर्शित 'अ' स्थिति के अनुसार बाएं पांव को आगे रखें। पंजे की नोक सामने की ओर रहनी चाहिए।
दाये पांव को दाईं ओर को आधा मुड़ा हुआ रहना चाहिए।
(२) चित्र में प्रदर्शित 'ब' स्थिति के अनुसार दाएं पांव को आगे एकदम सीधा रखें तथा बाएं पांव को बाएं ओर आधा मुड़ा हुआ रखना चाहिए।
(३) चित्र में प्रदर्शित 'स' स्थिति के अनुसार बाएं पांव को आगे सीधा रखें तथा दाएं पांव दाईं ओर को पूरा मुड़ा हुआ रखना चाहिए।
चित्र देखिए-
अभ्यास 9
'किक' मारना
आमुख:–अपने विरोधी को परास्त करने के लिए किक अर्थात पांव के ठोकर मारने की कला का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। हाथ के प्रहार की तुलना में पांव की ठोकर 5 गुना अधिक प्रभावकारी सिद्ध होता है।
'किक' मारते समय अपने शरीर का संतुलन अर्थात बैलेंस बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बैलेंस स्थिर रखने के लिए फुर्ति की आवश्यकता होती है। अतः इन दोनों का नियमित पूर्वाभ्यास करके दक्षता प्राप्त कर लेना आवश्यक है, ताकि समय पर उसका पूरा - पूरा लाभ उठाया जा सके।
'किक' का प्रयोग घुटने, पेट अथवा जांघों के जोड़ (अंडकोष) पर किया जाता है। इसके लगते ही विरोधी परास्त हो जाता है। किक मारने वाले को प्रत्याक्रमण से बचने के लिए तुरंत ही अपने बाएं हाथ की ओर घूम जाना चाहिए।
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Karate
