कोर्स पहला (1)
अंगों की मजबूती और प्रहार दक्षता-
मुख–
अंगुलियां, हथेली, कुहनी, घुटने, पांव और सिर-आपके शरीर के यह 6 अंग ही आत्मरक्षा के मुख्य हथियार हैं। यह जितने सशक्त होंगे, शत्रु पर आपका प्रहार उतना ही भयंकर सिद्ध होगा। इन्हें हथियार के समान तेज, कठोर और मजबूत बनाने के अभ्यास ओं में सफलता प्राप्त करना पहली शर्त है। निम्नलिखित अभ्यास उसे आप इन सभी अंगों को लगभग 6 मास में कठोर बना सकते हैं।
कोर्स पहला–
अंगुलियां
एक 10 से 12 इंच लकड़ी की पेटी अथवा बाल्टी में इतने चावल भरे कि वह अपने मुंह से केवल 1 इंच ही खाली रहे।
चावलों की उक्त पेटी अथवा बाल्टी में क्रमशः अपने दाएं तथा बाएं हाथ को तेजी के साथ कलाई तक घुसा कर तुरंत निकाल लें।
इस अभ्यास को प्रतिदिन 15 से 20 बार 2 सप्ताह तक करना चाहिए।
2 सप्ताह बाद पेटी अथवा बाल्टी में से चावल निकाल कर उनके स्थान पर नदी की चिकनी तथा सुखी रेत भर दें और उसमें भी पूर्वोक्त विधि से हाथ डालना आरंभ करें।
इस अभ्यास को भी नित्य 15 से 20 बार 8 सप्ताह तक करना आवश्यक है। इससे अंगुलियों तथा हथेलियों की त्वचा में पर्याप्त कठोरता आ जाएगी।
यदि और भी अधिक कठोरता लाना चाहे, तो रेत के बाद पेटी अथवा बाल्टी में पत्थर की महीन बजरी भरकर उसमें भी 5 से 7 सप्ताह तक पूर्वोक्त विधि से हाथ डालते रहें। अब आपकी उंगलियां तथा हथेलियां धारदार हथियार जैसी तेजी ग्रहण कर लेंगी। यह अभ्यास यहीं समाप्त कर दें।
हथेली की मजबूती–
कम से कम डेढ वर्ग फुट अथवा इससे अधिक बड़े एक समतल (चिकना हो तो अति उत्तम) पत्थर को पृथ्वी से लगभग साढे 3 फुट की ऊंचाई पर (मेज आदि के ऊपर) रखकर, उस पर गेहूं, जाओ अथवा धान के पुआल से भरी दो गद्दियो को एक दूसरे के ऊपर रखें। इन गद्दियो के अभाव में किसी पुराने कंबल को भी 4 तह करके रखा जा सकता है।
(1) अब, हथेली की कनिष्ठा उंगली के नीचे वाले भाग जिसे हथेली अथवा करवट की गद्दी भी कहा जाता है से उक्त गद्दी अथवा कंबल कीटों के ऊपर जोरदार प्रहार करें। यह ध्यान रहे कि कलाई की हड्डी का उससे स्पर्श ना हो।
प्रहार के समय पांचों अंगुलियों को आपस में मिलाएं रखना चाहिए।
उक्त विधि से नित्य 15 से 20 बार प्रहार करें। प्रहार करते समय ऐसी पोजीशन में खड़ा होना चाहिए ताकि आपके हाथ में दर्द ना हो।
(2) हथेली से प्रहार करने के पश्चात उक्त गद्दी पर क्रमशः चारों उंगलियों के पोरूवो से 10 से 15 बार प्रहार करें। ऐसा करते समय सभी अंगुलियां परस्पर मिली रहनी चाहिए। फिर, मुट्ठी बांधकर 10 से 15 बार घूसे से प्रहार करें। फिर कहानी के ऊपरी भाग से (जो समतल सा होता है) 10 से 15 बार प्रहार करें। तथा फिर मुट्ठी बांधकर तर्जनी तथा मध्यमा अंगुलियों की जड़ की हड्डियों से 10 से 15 प्रहार करें।
विधि से 6 मास तक अभ्यास करते रहने पर हथेली के सभी भाग तथा अंगुलियां पर्याप्त कठोर बन जाएंगी। अभ्यास के आरंभ में दो गद्दिया अथवा कंबल की चार तहे रखनी चाहिए। तथा तीन मास बाद एक गद्दी अथवा दो तहो को कम कर देना चाहिए। 5 महीने तक उक्त विधि से अभ्यास करते रहने के बाद नंगे पत्थर पर भी एक दो महीने तक अभ्यास कर लेने से पूर्णता प्राप्त हो जाती है। जैसा चित्र में दिखाया गया है–
अंगुलियों तथा हथेली को मजबूत बनाने के लिए दूसरा अभ्यास निम्नलिखित है–
कपड़े के किसी मजबूत थैले में नदी की रेत भरकर तथा मुंह बांधकर,उसे किसी मजबूत रस्सी द्वारा छत से इस प्रकार लटकाए कि वह आपके शरीर की ऊंचाई तक नीचे लटका रहे।
अब आपने 15 से 20 बार उक्त थैले पर अपने घुसे का प्रहार करते रहें। प्रतिदिन 40 से 50 बार तक प्रहार भी किया जा सकता है। घुसे हमेशा बड़ी तेजी से मारने चाहिए तथा थैली पर चोट करने के बाद हाथ को तुरंत ही हटा लेना चाहिए।
उक्त रेती पर पांव की ठोकर मार मार कर उन्हें भी मजबूत बनाया जा सकता है। हाथ तथा पैरों को मजबूत बनाने के लिए थैली पर 3 से 4 माह तक नियमित अभ्यास करना पर्याप्त रहता है। चित्र में देखिए –
पांव की मजबूती–
एक 7 फुट लंबे लकड़ी के गोल खंभे को जमीन 1 फुट गहरा गाड़ दे। उस के ऊपरी हिस्से में क्रमशः अपनी पिंडलियों की ऊंचाई पर, अपने पेट की ऊंचाई पर तथा अपने मुंह की ऊंचाई पर तीन रुई के तकिए बाध दें।
उक्त तकियो पर अपनी लात का प्रहार करके आप अपने पांव को मजबूत बना सकते हैं।
नित्य 15 से 20 बार लात का प्रहार करना ही पर्याप्त रहेगा। लात का प्रहार तेजी से करना चाहिए तथा उसे तेजी से हटा भी लेना चाहिए।
उक्त खंभे पर हाथ, मुट्ठी तथा कोहनी मारने का अभ्यास भी किया जा सकता है।
किक अर्थात पांव की ठोकर मारने के लिए भी पांव की मजबूती आवश्यक है। साथ ही ठोकर ठीक जगह पर ही लगे– इसका भी अभ्यास करना चाहिए।
किक के अभ्यास के लिए अपने कमरे की छत से किसी कपड़े की गेंद को मजबूती से बांधकर लटका दें। फिर उस पर किक मारने का अभ्यास करें।
गेंद पर सामने तथा बगल से किक मारना चाहिए क्रमशःएक बार दाएं और दूसरी बार बाएं पांव से किक मारना आवश्यक है। इस अभ्यास को प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक करना चाहिए। इससे आपकी टांगों की मांसपेशियां भी विकसित होंगी तथा पांव में स्फूर्ति का संचार भी होगा।
उक्त गेंद पर हाथ से घुसे मारने का अभ्यास भी किया जा सकता है।
घुटनों तथा सिर की मजबूती के लिए किसी अभ्यास को करने की आवश्यकता नहीं होती,क्योंकि यह दोनों अन्य स्वता ही अत्यंत कठोर होते हैं। सभी अंगों को स्वस्थ एवं शक्तिशाली बनाए रखने के लिए व्यायाम की सामान्य विधियों को अपनाया जा सकता है, परंतु स्मरण रखें कि जूडो कराटे जूजूत्सुआदि में शारीरिक स्वास्थ्य अथवा मोटापे का उतना महत्व नहीं है, जितना की चुस्ती, फुर्ती एवं तेजी से प्रहार करने की क्षमता का है।
धन्यवाद
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